शहीद मनीष यादव को अश्रुपूर्ण विदाई: : अरुणाचल में ड्यूटी के दौरान बलिदान, पैतृक गांव उमड़ा श्रद्धांजलि देने
SANDEEP SEN Editor
Mon, Dec 8, 2025
पीथमपुर (जीवन डोडिया)। देश के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर देने वाले अरुणाचल प्रदेश में तैनात 22 वर्षीय जवान मनीष यादव का पार्थिव शरीर शनिवार को जब पीथमपुर के उनके पैतृक गांव पहुंचा, तो पूरा इलाका मानो थम-सा गया। हर आंख नम थी, हर दिल में दर्द था, और हर जुबान पर एक ही शब्द— शहीद को सलाम।
भारतीय सेना के आर्मी टेक्निकल विभाग में तैनात मनीष यादव 3 दिसंबर को ड्यूटी के दौरान तकनीकी कार्य करते वक्त शॉर्ट सर्किट लगने से शहीद हो गए थे। सेना ने औपचारिकताएं पूरी कर 6 दिसंबर को उनका पार्थिव शरीर विशेष विमान से शहर लाया। वहां से सैन्य वाहन के साथ तिरंगे में लिपटा शव जब गांव पहुंचा तो माहौल शोक और गर्व से भर उठा।
रात देर तक ग्रामीणों, रिश्तेदारों और जनप्रतिनिधियों का घर पर तांता लगा रहा। लोग रोते हुए एक-दूसरे को संभालते और शहीद की बहादुरी को याद करते रहे। शनिवार सुबह सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने वीर साथी को अंतिम सलामी दी। तिरंगे में लिपटे मनीष के पार्थिव शरीर को कंधा देते हुए जवानों और ग्रामीणों की आंखें भर आईं। अंतिम यात्रा में मानो पूरा शहर उमड़ पड़ा— महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग… सभी के कदम शहीद की अमर गाथा को नमन करने बढ़ रहे थे।
मनीष यादव 3 अप्रैल 2024 को 623 ईएमई बटालियन में भर्ती हुए थे। पिता श्रीराम यादव मजदूर हैं, मां गृहिणी। तीन भाइयों और एक बहन के साथ भरे-पूरे परिवार का सहारा थे मनीष। अभी उनकी शादी भी नहीं हुई थी।

परिजनों ने बताया कि मनीष बेहद मेहनती, सरल स्वभाव के और देशभक्ति से ओत–प्रोत युवा थे। कुछ महीने पहले ही वे छुट्टी पर घर आए थे और फिर कर्तव्य की पुकार पर लौट गए थे। कौन जानता था कि यह उनकी अंतिम विदाई होगी।
जनप्रतिनिधियों और अफसरों ने परिवार से मिलकर सांत्वना व्यक्त की और शहीद के साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा को नमन किया।
देश ने आज एक और लाल खो दिया, पर मनीष अमर रहेंगे— उनके साहस की कहानी हर युवा को प्रेरित करेगी।
शहीद मनीष यादव को भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
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Jivan dodiya
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